Lab Experiment : पल्स एम्प्लिट्यूड मॉड्यूलेशन (PAM) का अध्ययन

उद्देश्य (Objective)

पल्स एम्प्लिट्यूड मॉड्यूलेशन (PAM) तकनीक का अध्ययन करना और मॉड्यूलेटेड सिग्नल (Modulated Signal) को ऑसीलोस्कोप (CRO) पर प्रदर्शित करना।

आवश्यक उपकरण (Apparatus Required)

  • PAM ट्रेनर किट (Trainer Kit)
  • कैथोड रे ऑसीलोस्कोप (CRO)
  • फंक्शन जनरेटर (Function Generator): (यदि किट में इनबिल्ट न हो)
  • BNC प्रोब्स और पैच कॉर्ड्स

सिद्धांत (Theory)

PAM एक ऐसी मॉड्यूलेशन तकनीक है जिसमें कैरियर (Carrier) के रूप में पल्स ट्रेन (Pulse Train) का उपयोग किया जाता है। इसमें पल्स की ऊंचाई (Amplitude), मैसेज सिग्नल (Information) के एम्प्लिट्यूड के अनुसार बदलती है।

  • मैसेज सिग्नल (Modulating Signal): यह कम फ्रीक्वेंसी वाली साइन वेव (Sine Wave) होती है।
  • कैरियर सिग्नल (Carrier Signal): यह उच्च फ्रीक्वेंसी वाली पल्स वेव (Square Wave) होती है।
  • PAM सिग्नल: आउटपुट में पल्स की चौड़ाई और पोजीशन वही रहती है, बस उनकी ऊंचाई मैसेज सिग्नल के साथ बदलती रहती है।

ब्लॉक आरेख (Block Diagram)

PAM सर्किट में मुख्य रूप से एक सैंपलर (Sampler) या मल्टीप्लायर का उपयोग होता है जो मैसेज सिग्नल को पल्स ट्रेन के साथ कंबाइन करता है।


कार्य विधि (Procedure)

  1. PAM ट्रेनर किट की पावर सप्लाई ऑन करें।
  2. फंक्शन जनरेटर से लगभग 1 kHz की साइन वेव (मैसेज सिग्नल) और 10 kHz की पल्स वेव (कैरियर) सेट करें।
  3. किट पर दिए गए मॉड्यूलेटर सेक्शन में इन दोनों सिग्नल्स को इनपुट के रूप में कनेक्ट करें।
  4. CRO के चैनल-1 पर मैसेज सिग्नल और चैनल-2 पर PAM आउटपुट को जोड़ें।
  5. CRO की सेटिंग्स (Volts/Div और Time/Div) को एडजस्ट करके वेवफॉर्म्स को स्थिर करें।
  6. मैसेज सिग्नल के वोल्टेज को थोड़ा बदलें और देखें कि आउटपुट पल्स की ऊंचाई पर क्या प्रभाव पड़ता है।

PAM डिमॉड्यूलेशन (Demodulation) प्रक्रिया

PAM सिग्नल से मैसेज सिग्नल को अलग करने के लिए Low Pass Filter (LPF) का उपयोग किया जाता है। चूँकि PAM सिग्नल में मैसेज सिग्नल की फ्रीक्वेंसी मौजूद होती है, इसलिए LPF केवल लो-फ्रीक्वेंसी मैसेज को पास करता है और हाई-फ्रीक्वेंसी पल्स कैरियर को ब्लॉक कर देता है।

डिमॉड्यूलेशन कार्य विधि (Procedure)

  1. PAM मॉड्यूलेटर के आउटपुट को डिमॉड्यूलेटर (Low Pass Filter) के इनपुट से जोड़ें।
  2. CRO के चैनल-2 पर डिमॉड्यूलेटर का आउटपुट देखें।
  3. यदि आउटपुट सिग्नल थोड़ा कमजोर या डिस्टोर्टेड है, तो किट पर लगे Gain Control या फिल्टर की कट-ऑफ फ्रीक्वेंसी को एडजस्ट करें।
  4. मूल मैसेज सिग्नल (Input) और प्राप्त मैसेज सिग्नल (Output) की तुलना करें।

Waveform

महत्वपूर्ण निष्कर्ष (Key Findings)

  • सैंपलिंग थ्योरम (Sampling Theorem): डिमॉड्यूलेशन सही तरीके से तभी होगा जब f_s >= 2f_m हो। यदि सैंपलिंग फ्रीक्वेंसी कम होगी, तो आउटपुट सिग्नल खराब (Distorted) आएगा, जिसे Aliasing कहते हैं।
  • Smoothing: लो पास फिल्टर पल्स के उतार-चढ़ाव को ‘स्मूथ’ करके वापस साइन वेव बना देता है।

सावधानियां (Precautions)

  • डिमॉड्यूलेटर सेक्शन में ग्राउंड कनेक्शन सही से चेक करें।
  • फिल्टर की सेटिंग्स को बहुत सावधानी से बदलें ताकि मैसेज सिग्नल की शेप सही बनी रहे।

परिणाम (Result)

PAM ट्रेनर किट की सहायता से पल्स एम्प्लिट्यूड मॉड्यूलेशन का सफलतापूर्वक अध्ययन किया गया। यह देखा गया कि आउटपुट पल्स का एम्प्लिट्यूड, मैसेज सिग्नल के अनुसार बदल रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *